Sipiyan

by Manoj Kumar

★★★★★
4.5 (612)

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Description

पुस्तक का परिचय सीपियाँ एक कोशिश है, ज़िदंगी की भागदौड़ के बीचों-बीच आधे छुपे, आधे ढके यथार्थ से, रूमानी साक्षात्कार की । जब भी सच से आंखें दो-चार हुई, कभी घबराकर, कभी शर्म से, नज़रें चुरा ली और बंद आंखों ने देख डाले अनगिनत ख्वाब । यही ख्वाब हमसफ़र रहे हैं, बेचैन रातों में बादलों से लुका-छिपी खेलते चांद के। ऐसे ही कुछ सीपियाँ उठा लाया था, भीगी रेत पर चलते-चलते। कुछ मोती भरी थीं और कुछ खाली, किंतु हर एक ने मुझ से अपनी कहानी कही। याद के समदंर से उठा लाया हूँ कुछ सीपियाँ । लहरों ने छुआ था इन्हें, द