Mahatma Gamdhi-Vicara-Vithika
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Description
लगभग 53 साल पहले संसार में एक अजूबा घटा था। एक लंगोटधारी दुबले-से महात्मा के नेतृत्व में अहिंसा की लड़ाई की परिणति हुई थी 14 अगस्त को रात बारह बजे - भारत की आज़ादी के रूप में । पूरा भारत उनके जयजयकार से गूंज रहा था पर वे स्वयं साम्प्रदायिकता की घिनौनी लड़ाई से बंगाल में जूझ रहे थे। ऐसे विलक्षण व्यक्ति के, जिसे विश्व के अनेक संगठनों ने पूरी सहस्राब्दि का सन्त सिरमौर माना है, विचारों की झलक है यह पुस्तक । पुस्तक में लेखक द्वारा गांधी जी पर लेखों का संकलन, उनका जीवन-दर्शन, उनके ‘विविध आयाम’ तथा ‘मी